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वन पर्व
अध्याय २३५
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वैशम्पाय़न उवाच
स्वस्तिमान्सहितः सर्वैर्भ्रातृभिः कुरुनन्दन |  २२   क
गृहान्व्रज यथाकामं वैमनस्यं च मा कृथाः ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति