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वन पर्व
अध्याय २३५
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चित्रसेन उवाच
धनञ्जय़श्च ते रक्ष्यः सह भ्रातृभिराहवे |  ६   क
स हि प्रिय़ः सखा तुभ्यं शिष्यश्च तव पाण्डवः ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति