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शान्ति पर्व
अध्याय २५९
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द्युमत्सेन उवाच
श्रेय़सः श्रेय़सीमेवं वृत्तिं लोकोऽनुवर्तते |  २६   क
सदैव हि गुरोर्वृत्तमनुवर्तन्ति मानवाः ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति