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वन पर्व
अध्याय २३६
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वैशम्पाय़न उवाच
नैतस्य कर्ता लोकेऽस्मिन्पुमान्विद्येत भारत |  १४   क
यत्कृतं ते महाराज सह भ्रातृभिराहवे ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति