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शान्ति पर्व
अध्याय २३७
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व्यास उवाच
येन पूर्णमिवाकाशं भवत्येकेन सर्वदा |  ११   क
शून्यं येन जनाकीर्णं तं देवा व्राह्मणं विदुः ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति