शान्ति पर्व  अध्याय २३७

व्यास उवाच

निराशिषमनारम्भं निर्नमस्कारमस्तुतिम् |  २४   क
अक्षीणं क्षीणकर्माणं तं देवा व्राह्मणं विदुः ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति