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शान्ति पर्व
अध्याय २३७
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व्यास उवाच
सर्वाणि भूतानि सुखे रमन्ते; सर्वाणि दुःखस्य भृशं त्रसन्ति |  २५   क
तेषां भय़ोत्पादनजातखेदः; कुर्यान्न कर्माणि हि श्रद्दधानः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति