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शान्ति पर्व
अध्याय २३७
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व्यास उवाच
वेदांश्च वेद्यं च विधिं च कृत्स्न; मथो निरुक्तं परमार्थतां च |  ३०   क
सर्वं शरीरात्मनि यः प्रवेद; तस्मै स्म देवाः स्पृहय़न्ति नित्यम् ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति