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शान्ति पर्व
अध्याय २३७
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व्यास उवाच
अगर्हणीय़ो न च गर्हतेऽन्या; न्स वै विप्रः परमात्मानमीक्षेत् |  ३५   क
विनीतमोहो व्यपनीतकल्मषो; न चेह नामुत्र च योऽर्थमृच्छति ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति