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शान्ति पर्व
अध्याय २३७
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व्यास उवाच
अरोषमोहः समलोष्टकाञ्चनः; प्रहीणशोको गतसन्धिविग्रहः |  ३६   क
अपेतनिन्दास्तुतिरप्रिय़ाप्रिय़; श्चरन्नुदासीनवदेष भिक्षुकः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति