वन पर्व  अध्याय २३७

दुर्योधन उवाच

माय़ाधिकास्त्वय़ुध्यन्त यदा शूरा विय़द्गताः |  ३   क
तदा नो नसमं युद्धमभवत्सह खेचरैः ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति