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शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
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व्यास उवाच
अय़ं हि नित्यः परमो महर्षि; र्महाविभूतिर्गुणवान्निर्गुणाख्यः |  ८८   क
गुणैश्च संय़ोगमुपैति शीघ्रं; कालो यथर्तावृतुसम्प्रय़ुक्तः ||  ८८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति