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अनुशासन पर्व
अध्याय ४८
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भीष्म उवाच
कुलस्रोतसि सञ्छन्ने यस्य स्याद्योनिसङ्करः |  ४३   क
संश्रय़त्येव तच्छीलं नरोऽल्पमपि वा वहु ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति