वन पर्व  अध्याय २३८

दुर्योधन उवाच

भ्रातॄनर्हसि नो वीर मोक्तुं गन्धर्वसत्तम |  २   क
अनर्हा धर्षणं हीमे जीवमानेषु पाण्डुषु ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति