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अनुशासन पर्व
अध्याय ८३
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वसिष्ठ उवाच
ते दीनमनसः सर्वे देवाश्च ऋषय़श्च ह |  ५७   क
प्रजग्मुः शरणं देवं व्रह्माणमजरं प्रभुम् ||  ५७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति