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शान्ति पर्व
अध्याय २३९
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व्यास उवाच
रूपं चक्षुर्विपाकश्च त्रिधा ज्योतिर्विधीय़ते |  १०   क
रसोऽथ रसनं स्नेहो गुणास्त्वेते त्रय़ोऽम्भसाम् ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति