शान्ति पर्व  अध्याय २३९

व्यास उवाच

चक्षुरालोचनाय़ैव संशय़ं कुरुते मनः |  १५   क
वुद्धिरध्यवसानाय़ साक्षी क्षेत्रज्ञ उच्यते ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति