शान्ति पर्व  अध्याय २३९

व्यास उवाच

तत्र यत्प्रीतिसंय़ुक्तं किञ्चिदात्मनि लक्षय़ेत् |  २०   क
प्रशान्तमिव संशुद्धं सत्त्वं तदुपधारय़ेत् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति