वन पर्व  अध्याय २३९

वैशम्पाय़न उवाच

वृहस्पत्युशनोक्तैश्च मन्त्रैर्मन्त्रविशारदाः |  २०   क
अथर्ववेदप्रोक्तैश्च याश्चोपनिषदि क्रिय़ाः |  २०   ख
मन्त्रजप्यसमाय़ुक्तास्तास्तदा समवर्तय़न् ||  २०   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति