स्त्री पर्व  अध्याय २४

गान्धार्यु उवाच

एता विलप्य वहुलं भर्तृशोकेन कर्शिताः |  १२   क
पतन्त्यभिमुखा भूमौ कृपणं वत केशव ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति