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शान्ति पर्व
अध्याय ८१
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भीष्म उवाच
विश्वस्तवदविश्वस्तस्तेषु वर्तेत सर्वदा |  ३९   क
न हि दोषो गुणो वेति निस्पृक्तस्तेषु दृश्यते ||  ३९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति