शान्ति पर्व  अध्याय ३७

व्यास उवाच

अरुणा मृत्तिका चैव तथा चैव पिपीलकाः |  १६   क
श्लेष्मातकस्तथा विप्रैरभक्ष्यं विषमेव च ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति