अनुशासन पर्व  अध्याय २४

भीष्म उवाच

अनग्नय़श्च ये विप्रा मृतनिर्यातकाश्च ये |  २०   क
स्तेनाश्च पतिताश्चैव राजन्नार्हन्ति केतनम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति