अनुशासन पर्व  अध्याय २४

भीष्म उवाच

उपाध्याय़ांश्च भृत्यांश्च भक्तांश्च भरतर्षभ |  ७६   क
ये त्यजन्त्यसमर्थांस्तांस्ते वै निरय़गामिनः ||  ७६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति