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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २४
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नारद उवाच
सङ्कल्पाज्जाय़ते हर्षः शव्दादपि च जाय़ते |  ५   क
रसात्सञ्जाय़ते चापि रूपादपि च जाय़ते ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति