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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २४
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्यास्तु तं स्थिरं ज्ञात्वा व्यवसाय़ं कुरुस्त्रिय़ः |  ११   क
निवृत्तांश्च कुरुश्रेष्ठान्दृष्ट्वा प्ररुरुदुस्तदा ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति