आश्रमवासिक पर्व  अध्याय २४

वैशम्पाय़न उवाच

प्रदक्षिणमथावृत्य राजानं पाण्डवास्तदा |  ३   क
अभिवाद्य न्यवर्तन्त पृथां तामनिवर्त्य वै ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति