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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २४
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वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य जननी देवी साधु निवर्त्यताम् |  ५   क
यथा युधिष्ठिरः प्राह तत्सर्वं सत्यमेव हि ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति