सभा पर्व  अध्याय २४

वैशम्पाय़न उवाच

सुमहान्संनिपातोऽभूद्धनञ्जय़वृहन्तय़ोः |  ७   क
न शशाक वृहन्तस्तु सोढुं पाण्डवविक्रमम् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति