आदि पर्व  अध्याय ४०

सूत उवाच

ततः स राजा प्रददौ वपुष्टमां; कुरुप्रवीराय़ परीक्ष्य धर्मतः |  ९   क
स चापि तां प्राप्य मुदा युतोऽभव; न्न चान्यनारीषु मनो दधे क्वचित् ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति