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भीष्म पर्व
अध्याय २४
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श्रीभगवानु उवाच
यः सर्वत्रानभिस्नेहस्तत्तत्प्राप्य शुभाशुभम् |  ५७   क
नाभिनन्दति न द्वेष्टि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ||  ५७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति