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उद्योग पर्व
अध्याय २२
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धृतराष्ट्र उवाच
तिष्ठेत कस्तस्य मर्त्यः पुरस्ता; द्यः सर्वदेवेषु वरेण्य ईड्यः |  ११   क
पर्जन्यघोषान्प्रवपञ्शरौघा; न्पतङ्गसङ्घानिव शीघ्रवेगान् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति