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भीष्म पर्व
अध्याय २४
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श्रीभगवानु उवाच
इन्द्रिय़ाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीय़ते |  ६७   क
तदस्य हरति प्रज्ञां वाय़ुर्नावमिवाम्भसि ||  ६७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति