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द्रोण पर्व
अध्याय २४
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सञ्जय़ उवाच
नैव कर्णो न ते पञ्च ददृशुर्वाणसंवृताः |  ४२   क
साश्वसूतध्वजरथाः परस्परशराचिताः ||  ४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति