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कर्ण पर्व
अध्याय २४
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देवा ऊचुः
त्वामृते सारथिं तत्र नान्यं पश्यामहे वय़म् |  १०५   क
त्वं हि सर्वैर्गुणैर्युक्तो देवताभ्योऽधिकः प्रभो |  १०५   ख
सारथ्ये तूर्णमारोह संय़च्छ परमान्हय़ान् ||  १०५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति