कर्ण पर्व  अध्याय २४

व्रह्मो उवाच

स तद्विकृष्य भगवान्दिव्यं लोकेश्वरो धनुः |  १२०   क
त्रैलोक्यसारं तमिषुं मुमोच त्रिपुरं प्रति |  १२०   ख
तत्सासुरगणं दग्ध्वा प्राक्षिपत्पश्चिमार्णवे ||  १२०   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति