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कर्ण पर्व
अध्याय २४
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व्रह्मो उवाच
स तीव्रं तप आस्थाय़ प्रसादय़ितवान्भवम् |  १३२   क
अस्त्रहेतोः प्रसन्नात्मा निय़तः संय़तेन्द्रिय़ः ||  १३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति