कर्ण पर्व  अध्याय २४

दुर्योधन उवाच

प्रतिज्ञाय़ ततो देवो देवतानां रिपुक्षय़म् |  १४५   क
रामं भार्गवमाहूय़ सोऽभ्यभाषत शङ्करः ||  १४५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति