उद्योग पर्व  अध्याय ८०

वैशम्पाय़न उवाच

पद्माक्षी पुण्डरीकाक्षमुपेत्य गजगामिनी |  ३५   क
अश्रुपूर्णेक्षणा कृष्णा कृष्णं वचनमव्रवीत् ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति