कर्ण पर्व  अध्याय २४

दुर्योधन उवाच

स त्वं देव प्रपन्नानां याचतां च दिवौकसाम् |  ५६   क
कुरु प्रसादं देवेश दानवाञ्जहि शूलभृत् ||  ५६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति