कर्ण पर्व  अध्याय २४

दुर्योधन उवाच

ततोऽव्रवीन्महादेवो धनुर्वाणधरस्त्वहम् |  ६४   क
हनिष्यामि रथेनाजौ तान्रिपून्वै दिवौकसः ||  ६४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति