कर्ण पर्व  अध्याय २४

देवा ऊचुः

दश नागपतीनीषां धृतराष्ट्रमुखान्दृढाम् |  ७२   क
द्यां युगं युगचर्माणि संवर्तकवलाहकान् ||  ७२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति