शान्ति पर्व  अध्याय ३५२

व्राह्मण उवाच

एवमेतन्महाप्राज्ञ विज्ञातार्थ भुजङ्गम |  ७   क
नातिरिक्तास्त्वय़ा देवाः सर्वथैव यथातथम् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति