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शल्य पर्व
अध्याय २४
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सञ्जय़ उवाच
समाश्वास्यापरे भ्रातॄन्निक्षिप्य शिविरेऽपि च |  १२   क
पुत्रानन्ये पितॄनन्ये पुनर्युद्धमरोचय़न् ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति