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शल्य पर्व
अध्याय २४
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सञ्जय़ उवाच
ते शूराः किङ्किणीजालैः समाच्छन्ना वभासिरे |  १४   क
त्रैलोक्यविजय़े युक्ता यथा दैतेय़दानवाः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति