menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय २४
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
पाञ्चाल्यस्तु ततः क्रुद्धः सैन्येन महता वृतः |  १७   क
अभ्यद्रवत्सुसंरव्धस्तावकान्हन्तुमुद्यतः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति