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शल्य पर्व
अध्याय २४
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सञ्जय़ उवाच
ततस्त्वापततस्तस्य तव पुत्रो जनाधिप |  १८   क
वाणसङ्घाननेकान्वै प्रेषय़ामास भारत ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति