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शल्य पर्व
अध्याय २४
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सञ्जय़ उवाच
तैः समन्तात्परिवृतः कुञ्जरैः पर्वतोपमैः |  २६   क
नाराचैर्विमलैस्तीक्ष्णैर्गजानीकमपोथय़त् ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति