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शल्य पर्व
अध्याय २४
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सञ्जय़ उवाच
अपश्यमाना राजानं वर्तमाने जनक्षय़े |  ३७   क
मन्वाना निहतं तत्र तव पुत्रं महारथाः |  ३७   ख
विषण्णवदना भूत्वा पर्यपृच्छन्त ते सुतम् ||  ३७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति