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वन पर्व
अध्याय २५४
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द्रौपद्यु उवाच
किं ते ज्ञातैर्मूढ महाधनुर्धरै; रनाय़ुष्यं कर्म कृत्वातिघोरम् |  ४   क
एते वीराः पतय़ो मे समेता; न वः शेषः कश्चिदिहास्ति युद्धे ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति